मूलभूत आवश्यकता

जीवन में मूलभूत आवश्यकताओं की वस्तु जुटाते रहे इससे आगे कभी बढ़कर देखा ही नहीं।
मंदिर मस्जिद के आगे कभी बढे ही नहीं।
शांति का उपदेश दिए और नफरत फैलाते रहे।
जातिवद वंशवाद विचारों में, ही फंस फंसे रहे।
जीवन में मूलभूत आवश्यकताओं की वस्तु जुटते रहे इससे आगे कभी  बढे ही नहीं।

देश में उच्च वर्ग और निम्न वर्ग के बीच की दूरियां बढ़ती रही।
भूख की कमी को मिटाने की कोशिश नहीं की जनता को बेवकूफ बनाते रहे।
लगे रहे वो अपनी किस्मत चमकाने में।
बना लिया घर अपना दूसरों को लूट के खाने में।
फायदा हुआ चंद लोगों को बाकी सब बेकार हुए।
जो बेकसूर थे अब वही  गुनहगार हुए।
जीव में मूलभूत आवश्यकताओं की वस्तु जूट रहे इससे आगे कभी बढे ही नहीं।

आपस में ही राजनीति करते रहे सरोकार के जोरों पर।
अपने फायदे की राजनीति करते रहे देश को अंधेरे में डालकर।
अब समझ में आया कि कुछ मुद्दे बहुत जरूरी है।
देश के आंतरिक मामले एवं सेवाएं बहुत जरूरी है।
देखा है मैंने अपने देश के लोगों को सेवाओं के अभाव में मरते।
कुछ तो लाइनों में लगकर और कुछ सड़कों पर चलते चलते।
इस विपदा की घड़ी में फिर भी साथ खड़े रहे।
बहुतों को खो दिया है। हमने इन सेवाओं के अभाव के चलते।
हम आपस में लड़ते रहे। अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए।
स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति की कमी है।
सरकार और संस्थाओं को आपस में मतभेद करते देखा।
जनता की लाचारी इतनी है पहले बेरोजगारी थी ऊपर से जानलेवा बीमारी है।
अस्पतालों की लाचारी देखो अपनों को बचाने में लगे रहे।
कुछ लोग उन पर ही उंगली उठाते रहे।
जीवन के मूलभूत आवश्यकताओं की वस्तु जुटाते रहे रहे इससे आगे कभी बढ़कर देखा ही नहीं।

इस बार का बस मुद्दा ये ही होना चाहिए।
देश की सुरक्षा और स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता हो
1 दिन उपवास करके रह सकते हैं।
लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य के बिना आगे हम नहीं लड़ सकते हैं।
अब लोगों को जागरूक होना है। देख लो विकसित अर्थव्यवस्था भी हार गई।
वह तो काबिल थे अपनों को बचाने के लिए पर जागरूक नहीं थे, इसीलिए वह भी हार गए।
काबिलियत की कमी नहीं है। लेकिन वह भी इस समस्या के आगे लाचार हो गए।
इसीलिए जागरूक होना ,भी जरूरी है। आने वाले भविष्य के लिए।
हम लड़ते रहे, मूलभूत आवश्यकताओं की वस्तुएं जुटाने के लिए।

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